यह दर्शन सनातन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच एक सेतु का कार्य करता है, यह सिद्ध करता है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति नाद (आदिम ध्वनि) से हुई है। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में नाद ब्रह्म (सृष्टि की ध्वनि) को अस्तित्व का मूल माना जाता है, जो आधुनिक भौतिकी के कंपन (vibration) और ऊर्जा के सिद्धांतों से मेल खाता है।
सृष्टि और नाद ब्रह्म का सिद्धांत
सनातन ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु ही संपूर्ण अस्तित्व का आधार हैं। उनकी नाभि से एक कमल उत्पन्न होता है, जिससे ब्रह्मा जी प्रकट होते हैं। ब्रह्मा के मुख से पहला शब्द “ॐ” (प्रणव नाद) उत्पन्न होता है, जो पंचमहाभूतों (पाँच महान तत्वों) की संरचना का कारण बनता है।
तत्वों की उत्पत्ति की प्रक्रिया
- आकाश (Ether – Ākāśa) → “ॐ” के कंपन से सबसे पहले आकाश तत्व बनता है।
- वायु (Air – Vāyu) → आकाश में गति उत्पन्न होने से वायु की रचना होती है।
- अग्नि (Fire – Agni) → वायु में घर्षण से अग्नि उत्पन्न होती है।
- जल (Water – Jala) → अग्नि के संघनन से जल बनता है।
- पृथ्वी (Earth – Prithvi) → जल के ठोस होने से पृथ्वी बनती है।
शिव की भूमिका: संहार और पुनर्निर्माण
जब सृष्टि अपनी पूर्णता को प्राप्त कर लेती है, तब भगवान शिव तांडव नृत्य करते हैं, जिससे संहार होता है। लेकिन यह विनाश केवल एक रूपांतरण (transformation) है, जो नई सृष्टि के लिए आधार तैयार करता है। भगवान विष्णु की नाभि से पुनः कमल प्रकट होता है और सृष्टि की यह प्रक्रिया पुनरारंभ हो जाती है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
यह सिद्धांत क्वांटम भौतिकी (Quantum Physics) और स्ट्रिंग थ्योरी (String Theory) से मेल खाता है, जो बताता है कि ब्रह्मांड कंपनात्मक ऊर्जा (vibrational energy) से निर्मित है।
“ब्रह्मांड में सब कुछ कंपन (Vibration) है।” – निकोल टेस्ला
नाद या ब्रह्मांडीय ध्वनि ऊर्जा को पदार्थ में परिवर्तित करती है, जो आधुनिक विज्ञान के निष्कर्षों के समान है।
नाद ब्रह्म और नाद योग का अभ्यास
नाद योग इस सिद्धांत पर आधारित है कि ध्वनि (Sound) के माध्यम से मानव चेतना को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जोड़ा जा सकता है।
✔ ॐ का जाप और विशिष्ट ध्वनि आवृत्तियाँ (Frequencies) व्यक्ति की चेतना को उच्च स्तर पर ले जाती हैं।
✔ यह मानव ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय करता है।
ग्रंथों से प्रमाण और श्लोक
1. वेदों में नाद ब्रह्म
ऋग्वेद 1.164.39
“Uta vācho’ram kṛṇute yam bibharti vāṇī.”
(ध्वनि ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति का आधार है।)
यजुर्वेद 40.17
“Om pūrṇamadaḥ pūrṇamidam pūrṇāt pūrṇamudachyate.”
(ॐ पूर्णता का प्रतीक है, जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड उत्पन्न और विलीन होता है।)
2. उपनिषदों में नाद का महत्व
नाद बिंदु उपनिषद 1.1
“Tasya vā etasya nādaḥ eva mūrtir.”
(संपूर्ण ब्रह्मांड नाद ब्रह्म का ही स्वरूप है।)
मांडूक्य उपनिषद 1.1
“Om ityetadakṣaraṃ idaṃ sarvaṃ.”
(ॐ ही ब्रह्मांड की शाश्वत ध्वनि है।)
3. भगवद गीता में ब्रह्मांडीय ध्वनि
भगवद गीता 7.8
“Raso’ham apsu kaunteya, prabhāsmi śaśi-sūryayoḥ। Nādaḥ svabhāve sarvasya, śabdaḥ khe pauruṣaṃ nṛṣu॥”
(हे अर्जुन! मैं जल में रस हूँ, सूर्य-चंद्रमा में प्रकाश हूँ, आकाश में ध्वनि हूँ और सभी प्राणियों में चेतना हूँ।)
4. शिव पुराण में ब्रह्मांडीय चक्र
शिव पुराण 2.1.16
“Nṛtyaṁ tāṇḍavaṁ arthāya saṁhārāya punaḥ punaḥ.”
(भगवान शिव तांडव नृत्य द्वारा बार-बार सृष्टि का संहार और पुनर्निर्माण करते हैं।)
